व्हाट्सएप हैकिंग :- व्हाट्सएप ऐप आपको बर्बाद कर देगा, कैसे बचे, क्या करें क्या नहीं

 पिंक वाट्सऐप में फोन हैक हो जाता है पता भी नहीं चलता




इस साइबर फ्रॉड के चपेट में पूरे देश के साथ मध्यप्रदेश भी आ चुका है। पिछले एक महीने में MP की राजधानी भोपाल में ही इस फ्रॉड के 28 से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं। 24 जून को कटारा हिल्स में रहने वाले एचके शर्मा के मोबाइल पर एक लिंक आया। उस लिंक के साथ डिस्क्रिप्शन में लिखा था कि अपने मोबाइल पर एक्सट्रा फीचर वाला पिंक वाट्सऐप इंस्टॉल करें। एचके शर्मा ने जैसे ही लिंक पर क्लिक कर ऐप इंस्टाल किया। उनके फोन पर रियल वाट्सऐप ने काम करना बंद कर दिया। मोबाइल फोन के हैक होने का शक होते ही उन्होंने तुरंत साइबर सेल से संपर्क किया। साइबर पुलिस ने मामले को सुलझाने के लिए उनकी सहायता ही और जांच शुरू कर दी।


21 जून को अरेरा कॉलोनी में रहने वाले सुबोध अहिरवार भी साइबर क्रिमिनल्स का शिकार हो गए। पिंक वाट्सऐप के लिंक पर क्लिक करते ही उनके फोन पर सभी यूपीआई पेमेंट वाले एप्लीकेशंस ने काम करना बंद कर दिया था। इसकी शिकायत के बाद साइबर सेल ने मामले की जांच शुरू की। भोपाल पुलिस के बाद हाल ही मुंबई पुलिस ने ट्विटर पोस्ट के जरिए पिंक वाट्सऐप को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है।


अब जानते हैं क्या होता है पिंक वाट्सऐप :-

साइबर क्रिमिनल्स लोगों के फोन में एक लिंक भेजते हैं। इस लिंक के साथ पिंक वाट्सऐप इंस्टॉल करने का लालच दिया जाता है। लिंक के साथ डिस्क्रिप्शन में लिखा होता है कि इस वाट्सऐप का आइकन पिंक कलर होगा। ये सामान्य वाट्सऐप का अपग्रेडेड वर्जन है। इसमें यूजर के ऑनलाइन स्टेटस को हाइड रखने, हिडन रहते हुए भी अन्य लोगों के लास्ट सीन पर नजर रखने जैसे कई प्रीमियम फीचर्स मिलते हैं। ये भी कहा जाता है कि ये ट्रायल वर्जन है और आप लकी यूजर हैं, जिसे कंपनी उपयोग के लिए दे रही है। इसके आधार पर आपका फीडबैक लेगी।


इसके बाद आपको पता भी नहीं चलता और फोन का कंट्रोल हैकर्स के हाथों में चला जाता है। वो आपके हर मैसेज को पढ़ सकता है। यहां तक कि फोन लगा सकता है और वॉलपेपर भी चेंज कर सकता है, लेकिन हैकर्स ऐसा कुछ नहीं करते। वो अपने शिकार को पता तक नहीं चलने देते कि उसका शिकार हो रहा है। पिंक वाट्सऐप में वो सारे मैसेज भी आते रहते हैं जो आपके असल वाट्सऐप पर आते हैं। इससे आपको लगता है कि सबकुछ ठीक है।


लिंक के जरिए फ्रॉड, क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का देते हैं लालच :-

उज्जैन में रहने वाले बीजेपी नेता के पास 9692706680 इस नंबर से एक कॉल आता है। फोन पर उन्हें एक अज्ञात व्यक्ति कहता है कि वो IDFC बैंक का कर्मचारी है। मनीष उनसे फोन का कारण पूछते हैं तो वो कहता है 'सर आपका सिबिल स्कोर अच्छा है, इसलिए बैंक आपको क्रेडिट कार्ड ऑफर कर रही है। ठग उनसे कहता है कि आप अभी SBI का क्रेडिट कार्ड उपयोग कर रहें, जिसकी लिमिट कम है, हमारा बैंक आपको ज्यादा लिमिट दे रहा है। वो मनीष को कई ऑफर्स भी बताता है।

इसके बाद मनीष IDFC का कार्ड लेने के राजी हो जाते हैं। ठग उनसे कहता है कि आपके फोन पर हम आपको एक लिंक भेजेंगे। लिंक में आप अपनी सारी बैंक डिटेल्स और अपनी पर्सनल जानकारी भरकर सेव कर दीजिएगा। ऑनलाइन एप्लिकेशन रिसीव होते ही आपके बैंक डिटेल्स को वेरिफाई करने के लिए बैंक की ओर से कुछ राशि आपके खाते में ट्रांसफर की जाएगी। अकाउंट वेरिफाइड होते ही कार्ड बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। कार्ड कुछ ही दिनों में घर भी आ जाएगा।इसके बाद मनीष के फोन पर एक लिंक आता है। लिंक ओपन करते हैं तो एक पेज खुलता है, देखने पर लगता है कि ये IDFC बैंक की ऑफिशियल साइट ही है। इसके बाद मनीष, ठग के बताए अनुसार अपनी और बैंक डिटेल्स की सारी जानकारी वेब पेज पर दिए फॉर्म पर भर देते हैं। डिटेल्स फिल करने के बाद जैसे ही सेव बटन पर क्लिक करते हैं, उनके अकाउंट में दस रुपए की राशि आती है।

इसके बाद उन्हें यूजर वेरिफाइड का एक मैसेज मिलता है। मनीष इसके बाद बिल्कुल निश्चिंत हो जाते हैं, लेकिन घंटे भर बाद उनके मोबाइल में बैंक से तीन अलग-अलग ट्रांजैक्शन के मैसेज आते हैं। तीनों ट्रांजैक्शन के जरिए उनके SBI क्रेडिट कार्ड से कुल 101,766 रुपए अन्य अकाउंट में ट्रांसफर किए गए थे।

हालांकि, ठग ने राशि निकालने से पहले जो पैसे भेजे वो उसने अकाउंट वेरिफाई करने के लिए ही भेजे थे। वो चेक करना चाहता था कि सारी जानकारी सही दी गई है या गलत। मनीष को ठगी का ये तरीका पता नहीं था, उनके दिमाग में तो ये था कि OTP पूछने वाले ही सिर्फ ठगी करते हैं।


नकली अंगूठे से ऐसे होता है ये फ्रॉड :-

प्रदेश के ग्रामीण इलाकों और कस्बों में ज्यादातर लोग आधार इनेबल पेमेंट सर्विस यानी AePS की मदद से अपने अकाउंट से पैसे निकालते हैं। इसके लिए सिर्फ आधार कार्ड और फिंगर प्रिंट की जरूरत होती है। किसी भी तरह की अन्य जानकारी देने की जरूरत नहीं होती।

धोखा ऐसे होता है कि जब लोग सेवा संचालन करने वाले के पास जाते हैं तो वो लोगों का रिकॉर्ड रखने के नाम पर एक कोरे कागज में उनके दस्तखत, आधार नंबर और अंगुलियों के निशान ले लेते हैं। इसके बाद ठग संचालक उन उंगलियों के निशान से सिलिकॉन पर उसी का बायोमेट्रिक फिंगर बनवा लेते हैं। इसी बायोमेट्रिक फिंगर के सहारे लोगों के अकाउंट से आसानी से पैसे निकाल लेते हैं। कई साइबर ठग आपका फोन हैक करके भी आधार और बायोमेट्रिक की जानकारी चुरा लेते हैं।


वीडियो कॉल के जरिए फ्रॉड, कपड़े उतारवा कर बना लेते हैं वीडियो :-

26 मई को ग्वालियर से न्यूड वीडियो कॉल के जरिए ठगी का मामला सामने आया। सिटी सेंटर इलाके में रहने वाले 80 साल के रिटायर्ड बीएसएफ असिस्टेंट कमांडेंट से 2 लाख 38 हजार रुपए की ठगी कर ली गई। दरअसल, रिटायर्ड कमांडेंट के पास कुछ दिन पहले एक लड़की का कॉल आया। लड़की ने कहा कि मैं आपकी फेसबुक फ्रेंड हूं। इसके बाद लड़की ने वीडियो कॉल किया और कपड़े उतार कर अश्लील बातें करने लगी। जब तक रिटायर्ड अधिकारी कुछ समझ पाते वीडियो कॉल रिकॉर्ड हो चुका था। रिटायर्ड कमांडेंट ने कॉल कट कर दिया।

इसके बाद उस लड़की और उसके दोस्त ने क्राइम ब्रांच का ऑफिसर बन कर बीएसएफ के रिटायर्ड आफिसर को वीडियो वायरल करने की धमकी दी। रिटायर्ड अफसर को कॉल के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए और कहा कि ये हम तुम्हारे परिजन को भेजेंगे। इसके बाद वो अफसर को लगातार ब्लैकमेल करने लगे और धीरे-धीरे कर 2 लाख 38 हजार रुपए ठग लिए। 

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