पापा मेरे सीने में बहुत दर्द हो रहा है, प्लीज बचा लो... जय श्रीराम... ये आखिरी शब्द हैं सार्थक टिकरिया के...
पापा मेरे सीने में बहुत दर्द हो रहा है, प्लीज बचा लो... जय श्रीराम... ये आखिरी शब्द हैं सार्थक टिकरिया के...
छतरपुर के नामी बिजनेसमैन आलोक टिकरिया के 17 साल के बेटे सार्थक की हार्ट अटैक से मौत हो गई। वह 12वीं क्लास का छात्र था। सोमवार को इस सत्र में वह पहली बार स्कूल पहुंचा था, जहां प्रेयर के बाद क्लास में जाते समय उसके सीने में तेज दर्द हुआ। वह बेहोश होकरगिर गया। टीचर्स ने उसे सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) दिया। इसके बाद पेरेंट्स को फोन किया।
परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. अरविंद सिंह ने मौत की पुष्टि करते हुए परिवार को बताया कि बच्चे को कार्डियक अरेस्ट हुआ था। असमय ही बेटे के बिछड़ने के दुख से जूझते हुए परिवार ने उसका नेत्रदान किया है।
नहाने के बाद शिवलिंग का निर्माण कर पूजा की
सार्थक ने 10वीं तक की पढ़ाई छतरपुर के महर्षि विद्या मंदिर स्कूल से की थी। 11वीं उसने सुमित अकादमी से पास की। इसके बाद 12वीं में उसने डीसेंट स्कूल में एडमिशन ले लिया था। सार्थक का वेट 102kg था, हाइट 174 सेमी यानी 5.7 फीट थी। वो रोज जिम जाता था। उस दिन भी सुबह 5 बजे वह उठा और सबसे पहले जिम गया। 6 बजे वह जिम से लौटा। सावन सोमवार होने से नहाने के बाद शिवलिंग का निर्माण कर पूजन किया। नाश्ता किया और फिर स्कूल की नई यूनिफॉर्म पहनी। पिता घर पर नहीं थे, इसलिए फोटो खींची और उनको भेजी। इसके बाद वह स्कूल के लिए रवाना हो गया।बोला- सीने में बहुत दर्द है, जल्दी से मेरा इलाज करवाइए
स्कूल वालों ने बताया कि सार्थक ने इसी साल एडमिशन लिया था। सोमवार को स्कूल में उसका पहला दिन था। सुबह दूसरे बच्चों की तरह वह प्रेयर में शामिल हुआ। इसके बाद अपनी क्लास में जाने लगा। बरामदे में अचानक उसके सीने में दर्द हुआ। जिसके बाद परिजन को कॉल कर सूचना दी गई। परिवार वाले अपनी गाड़ी से उसे जिला अस्पताल ले गए। इस दौरान वह बात करता रहा।
सार्थक के चाचा अरुण ने कहा- मेरे बड़े भाई आलोक को सोमवार सुबह 9-10 बजे के बीच स्कूल से कॉल आया। स्कूल वालों ने कहा- बच्चे को घबराहट हो रही है, उसे सीने में दर्द की शिकायत है। आप तत्काल आ जाएं। हम कुछ ही मिनट में स्कूल पहुंच गए। यहां देखा कि स्टाफ के 5-7 लोग सार्थक को कुर्सी के सहारे ऊपर के फ्लोर से नीचे लेकर आ रहे थे। हमने भी उसे नीचे लाने में सहयोग किया। इस दौरान सार्थक से पूछा- बेटा क्या हो रहा है। उसने कहा- सीने में बहुत दर्द है। सांस लेने में काफी परेशानी हो रही है। जल्दी से मेरा इलाज करवाइए।
ट्रैफिक ने बहुत समय खराब किया
हमने उसे अपनी कार में लिटाया, लेकिन उसने कहा- मुझे बैठना है। भैया उसके साथ कार में पीछे बैठ गए। भैया ने कहा- बेटा आप भगवान का नाम लीजिए। जयश्री राम, सीता-राम, सीता-राम कहिए। हम अस्पताल चल रहे हैं। सार्थक ने भगवान का नाम जपना शुरू किया, लेकिन उसे दर्द इतना था कि वह सही से बोल भी नहीं कर पा रहा था। हम उसे लेकर तत्काल अस्पताल रवाना हुए। अस्पताल के रास्ते में ट्रैफिक ने बहुत समय खराब किया। लोगों ने बीच रास्ते पर गाड़ी खड़ी कर दी थी। बार-बार कहने के बाद आराम से गाड़ी हटाते रहे। भैंसासुर वाले रोड पर तो एक गाड़ी फंसी थी, जिस कारण हमें कार रिवर्स लेनी पड़ी। करीब 10 मिनट इस सब में खराब हो गया।
लिफ्ट के बाहर 10 मिनट तक वेट करना पड़ा
जैसे-तैसे अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने तत्काल इलाज शुरू किया। डॉ. राजकुमार अवस्थी ने ईसीजी की तैयारी की। उन्होंने कहा- पैनिक अटैक है। घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने तत्काल इंजेक्शन लगाना चाहा। सार्थक थोड़ा हेल्दी था, इस कारण इंजेक्शन लगाने के लिए नस मिलने मे समस्या आई। पैरामेडिकल स्टाफ की हड़ताल होने के बाद भी उन्होंने बच्चे को आईसीयू में शिफ्ट करवाने को कहा। आईसीयू में जाने के लिए हमें लिफ्ट के बाहर 10 मिनट तक वेट करना पड़ा। लिफ्ट के भीतर जब हम दाखिल हुए तो स्ट्रेचर पर लेटे-लेटे वह उठ गया। वह बोला- पापा मुझे बहुत दर्द हो रहा है, प्लीज मुझे बचा लो। उसने जय श्रीराम बोला और फिर वह स्ट्रेचर पर गिर गया। यह उसके आखिरी शब्द थे।
इसके बाद हम दूसरी मंजिल स्थित आईसीयू में पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने तैयारी कर रखी थी। वे उसे तत्काल वेंटिलेटर पर लेकर गए। शॉक दिया, उन्होंने हरसंभव कोशिश की, लेकिन बच्चा नहीं बचा। अस्पताल में वह करीब 20 से 25 मिनट तक जिंदा रहा।
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