स्कंद पुराण मैं भगवान शिव ने सनत्कुमार से स्वयं इस बात का उल्लेख किया है कि उन्हें सावन का महीना बहुत प्रिय है क्योंकि इस समय बारिश का महीना रहता है और इसी महीने में भगवान शिव को चढ़ने वाले फल फूल इत्यादि आते हैं
साथ ही इसी महीने में कावड़ियों के द्वारा कावड़ यात्रा निकाली जाती है माना जाता कि देवता और असुरों के बीच अमृत के लिए हुए समुद्र मंथन में अमृत की जगह जब विष निकलने लगा,
जब किसी को कुछ समझ नहीं आया कि अब क्या करें क्योंकि उस विष की अगर एक भी बूंद समुद्र या धरती पर गिर जाती तो लाखों प्राणी मारे जाते हैं इसलिए शिव जी जिन्हें अमृत से कोई मतलब नहीं था,
फिर भी उन्होंने उस विष को अपने गले में दबा लिया, माना जाता है इसी विष के कारण शिव जी के गले में गर्मी होने लगी, तभी से शिव जी की गले की गर्मी को ठंडा करने के लिए कावड़िए हर साल शिव जी को जल चढ़ाते हैं और उनके गले को ठंडक पहुंचाते है
शिवजी को प्रसन्न कैसे करें :-
सुबह जल्दी उठकर स्नान करके भगवान शिव की पूजा करें और इनमें से आपसे जो हो सके उससे भगवान शिव का अभिषेक करें
(जल दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, गंगाजल, चमेली का फूल, गन्ने का रस, सरसों का तेल चीनी चंदन केसर अभिषेक करें )
फिर ओम नमः शिवाय के नाम की माला का जाप करें,
साथ ही अगर हो सके तो आप सोमवार का व्रत कीजिए और इस दिन कोई भूखा दिखे तो उसे भोजन कराएं, गाय बैल को चारा खिलाएं
भगवान शिव को प्रसन्न करने वाले मंत्र :-
● ओम नमः शिवाय
● महामृत्युंजय मंत्र :-
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ।
● शिव तांडव
●ॐ सर्वात्मने नम:
● ॐ त्रिनेत्राय नम:
● ॐ हराय नम:
●ॐ इन्द्रमुखाय नम:
● ॐ श्रीकंठाय नम:
● ॐ वामदेवाय नम:
● ॐ तत्पुरुषाय नम:
● ॐ ईशानाय नम:
● ॐ अनंतधर्माय नम:
● ॐ ज्ञानभूताय नम:
● ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नम:
● ॐ प्रधानाय नम:
● ॐ व्योमात्मने नम:
● ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम:
भगवान शिव के इन मंत्रों का जाप बहुत ही आराम से बिना त्रुटि किए करना चाहिए, जिससे मंत्रों का पूर्ण फल प्राप्त हो।
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